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पति और पत्नी की कहानी
एक छोटे से शहर में आरव और मीरा नाम का दंपती रहता था। आरव एक साधारण नौकरी करता था और मीरा घर संभालने के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। दोनों का जीवन सादा था, पर सपने बड़े थे।
शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ आसान लगता था, लेकिन समय के साथ जिम्मेदारियाँ बढ़ीं। कभी पैसों की चिंता, कभी काम का दबाव—छोटी-छोटी बातों पर बहस हो जाती। आरव सोचता कि वह दिन-रात मेहनत करता है, फिर भी मीरा खुश क्यों नहीं रहती। मीरा को लगता कि आरव उसके प्रयासों को समझता ही नहीं।
एक दिन तेज बारिश में आरव देर से घर लौटा। मीरा ने बिना कुछ कहे गरम चाय उसके सामने रख दी। आरव थका हुआ था, पर उस चाय की भाप में उसे मीरा का स्नेह दिखा। उसने पहली बार ध्यान से देखा—मीरा की आँखों में चिंता थी, शिकायत नहीं।
उसी रात दोनों ने खुलकर बात की। आरव ने माना कि वह अपनी थकान में मीरा की मेहनत भूल जाता था। मीरा ने स्वीकार किया कि वह अपनी बात सही ढंग से कह नहीं पाती थी। उन्होंने तय किया कि हर समस्या को मिलकर सुलझाएँगे—एक-दूसरे की बात सुने बिना फैसला नहीं करेंगे।
समय बदला। आरव काम से लौटते समय मीरा के लिए कभी फूल, कभी उसकी पसंद की मिठाई लाने लगा। मीरा ने भी आरव के सपनों का साथ दिया, उसकी छोटी-छोटी जीतों पर खुशी मनाई। घर में फिर से हँसी लौट आई।
सालों बाद, जब बच्चे बड़े हो गए, लोग उनसे पूछते—सुखी शादी का राज क्या है?
आरव मुस्कुराकर कहता, “सम्मान।”
मीरा जोड़ती, “और संवाद।”
उनकी कहानी यह सिखाती है कि पति-पत्नी का रिश्ता परफेक्ट होने से नहीं, बल्कि साथ-साथ सीखते रहने से खूबसूरत बनता है। #new#patiपति और पत्नी की कहानी एक छोटे से शहर में आरव और मीरा नाम का दंपती रहता था। आरव एक साधारण नौकरी करता था और मीरा घर संभालने के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। दोनों का जीवन सादा था, पर सपने बड़े थे। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ आसान लगता था, लेकिन समय के साथ जिम्मेदारियाँ बढ़ीं। कभी पैसों की चिंता, कभी काम का दबाव—छोटी-छोटी बातों पर बहस हो जाती। आरव सोचता कि वह दिन-रात मेहनत करता है, फिर भी मीरा खुश क्यों नहीं रहती। मीरा को लगता कि आरव उसके प्रयासों को समझता ही नहीं। एक दिन तेज बारिश में आरव देर से घर लौटा। मीरा ने बिना कुछ कहे गरम चाय उसके सामने रख दी। आरव थका हुआ था, पर उस चाय की भाप में उसे मीरा का स्नेह दिखा। उसने पहली बार ध्यान से देखा—मीरा की आँखों में चिंता थी, शिकायत नहीं। उसी रात दोनों ने खुलकर बात की। आरव ने माना कि वह अपनी थकान में मीरा की मेहनत भूल जाता था। मीरा ने स्वीकार किया कि वह अपनी बात सही ढंग से कह नहीं पाती थी। उन्होंने तय किया कि हर समस्या को मिलकर सुलझाएँगे—एक-दूसरे की बात सुने बिना फैसला नहीं करेंगे। समय बदला। आरव काम से लौटते समय मीरा के लिए कभी फूल, कभी उसकी पसंद की मिठाई लाने लगा। मीरा ने भी आरव के सपनों का साथ दिया, उसकी छोटी-छोटी जीतों पर खुशी मनाई। घर में फिर से हँसी लौट आई। सालों बाद, जब बच्चे बड़े हो गए, लोग उनसे पूछते—सुखी शादी का राज क्या है? आरव मुस्कुराकर कहता, “सम्मान।” मीरा जोड़ती, “और संवाद।” उनकी कहानी यह सिखाती है कि पति-पत्नी का रिश्ता परफेक्ट होने से नहीं, बल्कि साथ-साथ सीखते रहने से खूबसूरत बनता है। #new#pati0 Commenti 0 condivisioni 31 Views 0 Anteprima1
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Jay mata diiJay mata dii0 Commenti 0 condivisioni 19 Views 0 Anteprima1
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