अलमारी से मिले हुए बचपन के खिलोने,
मेरी आंखों की उदासी देखकर बोले,
तुम्हें ही बहुत शौक़ था बड़ा होने का"
मेरी आंखों की उदासी देखकर बोले,
तुम्हें ही बहुत शौक़ था बड़ा होने का"
अलमारी से मिले हुए बचपन के खिलोने,
मेरी आंखों की उदासी देखकर बोले,
तुम्हें ही बहुत शौक़ था बड़ा होने का"
0 Kommentare
0 Geteilt
24 Ansichten
0 Bewertungen