उस के खयालो से बच के कहाँ जाऊं, वो मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आता है..! कभी तुम ग़ौर से सुनना बहुत किस्से सुनाती है !! मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना, तेरे दर्द का ये असर आख़िरी है...! मैं जो जिंदगी हूँ तो वो भी हैं अना का कैदी, मेरे कहने पर कहाँ उसने चले आना है !!
उस के खयालो से बच के कहाँ जाऊं, वो मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आता है..! कभी तुम ग़ौर से सुनना बहुत किस्से सुनाती है !! मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना, तेरे दर्द का ये असर आख़िरी है...! मैं जो जिंदगी हूँ तो वो भी हैं अना का कैदी, मेरे कहने पर कहाँ उसने चले आना है !!
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